सुंदरता का मूल्य।

सुंदरता का मूल्य। =========== एक अती सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई। उस 'सुंदर' महिला ने एयरहोस्टेस से बोला "मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ...
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भीतर के “मैं” का मिटना जरूरी है।

भीतर के "मैं" का मिटना जरूरी है। सुकरात समुन्द्र तट पर टहल रहे थे। उनकी नजर तट पर खड़े एक रोते बच्चे पर पड़ी। वो उसके पास गए और प्यार से बच्चे के सिर पर हाथ फेरकर पूछा - "तुम क्यों रो रहे हो ?" लड़के ने कहा - "ये जो मेरे हाथ में प्याला है मैं उसमें इस समुन्द्र को भरना चाहता हूँ। पर यह मेरे प्याले में समाता ही नहीं।" बच्चे की बात सुनकर सुकरात विस्माद में चले गये और स्वयं रोने...
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ये है मनुष्य कि औकात फिर घमंड कैसा

ये है हमारी औकात फिर घमंड कैसा एक माचिस की तिल्ली, एक घी का लोटा, लकड़ियों के ढेर पे, कुछ घण्टे में राख..... बस इतनी-सी है *आदमी की औकात !!!!* एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया , अपनी सारी ज़िन्दगी , परिवार के नाम कर गया, कहीं रोने की सुगबुगाहट , तो कहीं फुसफुसाहट .... अरे जल्दी ले जाओ कौन रखेगा सारी रात... बस इतनी-सी है *आदमी की औकात!!!!* मरने के बाद नीचे देखा , न...
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मारवाड़ी भजन कबीर साहब की एक साखी

मारवाड़ी भजन कबीर साहब की एक साखी :-कहया सुणयारी हे नहीं मारी हेली। परसिया हीं परिहाण । अर्थात:- हमारे धर्म(सतनामी पन्त)और समाज का हर एक नियम मात्र कहने-सुनने का ही नही है बल्कि उन पर चलने का हमारा सामूहिक रूप से पहला दायित्व है। अगर सरे पर नहीं चलते हैं तो हमें सांसारिक जीवन में भी किसी न किसी रूप में दुःख (सजा स्वरूप) मिलता ही है। हमें सदैव सुख ही मिला था अगर दुःख का अन...
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